सीमेंट प्लांट को न लेकिन विकास को हाँ | | मेरा नौहरा मेरी जन्नत |

11:33 PM

सीमेंट प्लांट को न लेकिन विकास को हाँ | मेरा नौहरा मेरी जन्नत | समय की मांग विकास है  प्रदूषण नहीं  |


जन्नत किसे कहते है आप ? 
अगर कोई मुझसे पूछे तो में कहूँगी जहाँ हम हर दिन खुली हवा में सांस ले सकें , जहाँ चारों तरफ हरियाली हो , जहाँ लोग बिना पंखें और एसी के कई पुश्तों से रह रहें हो . मेरे लिए जन्नत है वो जगह जहाँ मैं पैदा हुई और जो सब गुण मेने पहले कहे वो सब मुझे एक हिमाचली या यूँ कहे नोहरा में पैदा होने से बिना कुछ दिए मिल गए . जब भी अपने प्रोजेक्ट्स ख़तम करके घर आती हूँ तो जो सुकून , शुद्ध हवा , साफ़ या कहें फिल्टर्ड पानी यहाँ मिलता है उससे एक अलग ही उर्जा मिलती है . लोग आर्गेनिक फार्मिंग करते है , जयादा मुनाफा हो तो भी पूरा परिवार  शुद्ध खाद्य पदार्थ खा रहा है . पशुपालन , कृषि और बागवानी यहाँ का प्रमुख पेशा है . सर्दियों में बरफ से ढके पहाड़ तो गर्मी में बिना पंखें वाला मोसम होता है यहाँ , लेकिन अचानक से एक दिन अख़बार की एक कटिंग फॅमिली वाट्सेप ग्रुप में आती है कि नोहराधार में सीमेंट प्लांट लगेगा . नोहराधार के आप पास के कुछ इलाकों में सफ़ेद चुना पत्थर पाया जाता है , कुछ जमीन सरकारी है तो कुछ निजी . जाहिर सी बात है जो जमीन निजी है वो छोडनी होगी . बहुत लोग इस सीमेंट प्लांट का विरोध कर रहे है , लेकिन ऐसा भी एक तबका है जिन्हें लगता है सीमेंट प्लांट लगना चाहिए . जो लोग सीमेंट प्लांट को सपोर्ट कर रहे है उनका तर्क है इससे रोजगार मिलेगा , विकास होगा , लेकिन क्या अभी हमारे पास आय का कोई साधन नहीं है ?
क्या नोहरा के हर घर में खेती नहीं हो रही ?
क्या नगदी फसलें नहीं उगाई जा रही ?

कृषि और बागवानी में नई तकनीकों और उससे बेहतर करने के साधनों की जरुरत 

सच बात तो ये है कि नोहरा का हर परिवार ज्यादातर खेती पर निर्भर है , हम फसलें उगा रहे है , बेच रहे है और खुद भी उसकी खपत कर रहे है . आज लगभग 80 से 85 प्रतिशत लोग नोहरा में आय के लिए खेती और बागवानी पर निर्भर है . मुझे पता है कुछ लोग कहेंगे ज्यदा फायदा तो हो नहीं रहा , पैदावार कम है आदि आदि लेकिन क्या हम अपने परिवार को शुद्ध चीजें नहीं खिला रहे , आलू अपना है , मटर अपना है , लहसुन अपना है , मक्की अपनी है , धनिया अपना है  और भी न जाने कितना कुछ . अगर आय को और ज्यदा बढाना है तो खेती करने के नए तरीके सिखने होंगे , नई तकनीक का इस्तेमाल केसे करें की पैदावार बडे, जब पदावर बढेगी तो आय भी बढेगी . समय की मांग सीमेंट  प्लांट नहीं जानकारी और खेती को बेहतर करने के साधनों का उपयोग करने की जरुरत है . क्यों हम इसे कृषि बागवानी केम्पो की मांग नहीं करते जिससे हम कृषि और बागवानी से नोहरा को समृद्ध बनायें . क्यों हम राजी हो जाते है अपनी जमीन बेच कर एक सीमेंट प्लांट में नोकर बनने को ?

पर्यटन को बढावा मिले तो आय के और साधन भी बढेंगे 


नोहरा मेरे लिए जन्नत है , मुझे हमेशा लगता है कि सिरमौर के पहाड़ी इलाकों को पर्यटन की दृष्टि से कभी बढ़ावा नहीं मिल पाया , यही वजह है कि यहाँ न तो टूरिस्ट ज्यादा आता है न ही यातायात के साधन बहुत ज्यादा उपलब्ध है और न ही शिक्षा के क्षेत्र में इससे बढावा मिला . अगर टूरिज्म को बढावा मिलेगा और लोग ज्यादा से ज्यादा यहाँ  आएंगे तो जाहिर सी बात है सड़कों की हालत भी ठीक होगी . मुझे याद नहीं की सिरमौर के पहाड़ी इलाके से संगडाह के अलावा कही से चंडीगढ़ डाइरेक्ट बस जाती है और  न ही हम कोई रोष प्रकट करते है इस बारे में . हमे लगता है सब ठीक है या चलो काम तो चल रहा है , लेकिन क्या हमारा फर्ज नहीं कि हम आने वाली पीढ़ी को बेहतर कल दिखाएँ ?  विकास इन सब बेसिक सुविधायों से होगा जिसकी हम मांग नहीं करते . किंकरी देवी जो की पढ़ी लिखी भी नहीं थी संगडाह में अवैध खनन को रोकने के लिए  अनशन पे बैठ गई थी बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केस जीता और लगभग 19 अवैध माइने बंद हो गई  तो क्या हमे समझ नहीं आ रहा की ये विकास हमे नहीं चाहिए जिसके लिए हमे अपना घरबार छोरना पड़ेगा ? अगर विकास सही मायने में होना है उससे न तो किसी की जमीन छूटनी चाहिए और न पर्यावरण को नुक्सान होना चाहिए . हमे एसा विकास चाहिए जहाँ पूरे क्षेत्र का विकास हो जिसे सर्वागीण विकास कहते है .
Photo by Tanuj Jhalaan

शैक्षणिक संस्थान न होने से आय का कितना हिस्सा खर्च हो रहा है ? 

आज भी नोहरा और आस पास के बच्चे  स्कूल , कॉलेज , प्रोफेशनल कॉलेज के लिए दुसरे जिलों या प्रदेशों में जाते है . क्या हम समझ रहे है की जो आय हमारे पास है उसका कितना बड़ा हिस्सा बच्चे की पढाई , उसके बाहर रहने और खाने पीने में चला जाता है ? लेकिन क्या जितने जोर शोर से हम सीमेंट प्लांट को सहमति के लिए समर्थन दे रहे है , हर रोज चर्चा कर रहे है लोगो के हस्ताक्षर ले रहे है कभी बैठकर  हमने अपने इलाके में शिक्षा या शेक्षणिक संस्थानों की मांग के लिए इतना हंगामा किआ है ? शायद नहीं और यही वजह है कि आज भी हम न चाहते हुए भी बच्चों को सोलन , नाहन , शिमला , चंडीगढ़ , दिल्ली या मुंबई भेज देते है . पढाई तो पढाई है अगर इसे कॉलेज हमारे आस पास उपलब्ध हों तो लाखों रुपये बचाए जा सकते है . 

स्वास्थ्य सुविधायों को बेहतर करने की जरुरत सीमेंट प्लांट की नहीं 

हम सीमेंट प्लांट के लिए तो लड़ रहें है लेकिन कभी स्वास्थ्य , शिक्षा , यातायात , पर्यटन आती की सुविधायों के बारे में शायद ही बात करते है . ये मेरा व्यक्तिगत विचार है कि अगर हम आज सीमेंट प्लांट को हाँ कहते है तो ये खुबसूरत नोहरा जिसे में जन्नत कहती हूँ प्राकृतिक रूप से कभी विकसित नहीं हो पायेगा . में तो यहाँ अच्छी सड़क , साफ़ वातावरण , शिक्षित , समृद्ध और संपन्न लोगो को देखना चाहती हूँ सीमेंट प्लांट से उठाते धुएं या उससे उजड़े , बंजर और प्रदूषित नोहरा को नहीं .
जो लोग ये तर्क दे रहे है इससे विकास होगा वो अपनी जगह सही है लेकिन क्या हमे ऐसा विकास मंजूर है जिसकी कीमत हमारी जान हो ? हमारे पास न तो अच्छे हॉस्पिटल और न ही मोजूद हॉस्पिटल में बेहतर सुविधाएँ
और कितनी आसानी से हमे मंजूर है सोलन या शिमला जाना लेकिन क्या हम कोई बैठक या हड़ताल करते है सवास्थ्य सुविधाएँ अपने इलाके में बेहतर करने के लिए? जबाब नहीं है और में हम सबकी बात कर रही हूँ जिसमे मैं भी शामिल हूँ. ये समय है अपने हक और बेहतर सुविधायों के लिए मांग करने का न कि सीमेंट प्लांट को हाँ कहने का जिससे की कुछ लोगो को रोजगार तो मिलेगा लेकिन हमे और आने वाली पीढीयों को इसकी कीमत चुकानी होगी .
 हम अपनी जान की कीमत पर ही सीमेंट प्लांट को हाँ कह रहे है . आने वाली पीढ़ियाँ न तो बरफ से ढके पहाड़ देख पायेगी और न ही हरे भरे खेत . शायद खेती , बागवानी , शुद्ध हवा , बिना पंखे या ऐसी वाला घर फिर किताबो में देखने या पड़ने को मिलेगा .

नोकरी सीमेंट प्लांट से नहीं अच्छी शिक्षा और सुविधाओं से मिलेगी
हालाँकि एक अख़बार की  रिपोर्ट की माने   तो सीमेंट कंपनी 1250 लोगो को रोजगार मिलेगा , लेकिन हमारी जमीन तो हमारे पास नहीं रहेगी , जो लोग नोकरी करेंगे या जिन लोगो की जमीन  प्लांट को दी जाएगी उसके पेसे तो मिलेंगे लेकिन सालो से जो मिटटी हमे अनाज देती आई , हमारे घर को चलाने में हमारी मदद की और जो शुद्ध अनाज पुरे परिवार को मिला क्या उससे चोरना इन्साफ है ? आज हम सब स्वच्छ वातावरण में रह रहे है और स्वस्थ है क्या नोकरी करके सीमेंट प्लांट में काम करके हमारा स्वास्थ्य और आस पास का वातावरण वेसा ही रहेंगा ? बिलकुल नहीं . जो क्षणिक सुख हमे दिख रहे है आगे चलकर यही हमारे लिए खतरा बनने वाला है .

चलो हक मांगते है सीमेंट प्लांट नहीं 
अगर आवाज़ उठानी है तो एक साथ अच्छी सड़कों , बस सुविधायों , शिक्षा , स्वास्थ्य  आदि के लिए उठाते है वो भी साथ मिलकर . जिसमे कोई किसी पार्टी का नहीं  होगा बल्कि सब सिर्फ नोहरा के होंगे . न जाने कितनी जगह पर लोगो ने सीमेंट प्लांट लगने का विरोध किया , कारण एक ही है कि लोग प्रकृति से खिलवाड़ नहीं करना चाहते नोकरी के झांसे में आकर . 
मुझे पता है बहुत अलग अलग प्रतिक्रियां आयेगी सभी लोगो की लेकिन मुझे लगता है की विकास एक लम्बी प्रक्रिया है और हमे इसके लिए लड़ना होगा , अपना हक माँगना होगा , उन सभी चीजों का विरोध करना होगा जो हमे बस क्षणिक विकास का रास्ता बताते है . जिन जिन जागों पर इसे प्लांट या कारखाने लगे है वो जगह उजाड़ हो चुकी है. लोग आज सुकून चाहते है और नोहरा में पैदा होकर ये हमे विरासत में मिला है , क्या हम इससे जाने देंगे ? लोग शहरों से वीकेंड पर पहाड़ों की और भाग रहें है जहाँ साफ़ हवा पानी हो , पंखें और ऐसी वाली ज़िन्दगी से दूर और हमे ये सब बिना कुछ दिए ही मिल गया , क्या इतनी आसानी से हम इससे जाने देंगे ? जब हमने इससे ख़रीदा ही नहीं तो हम कोण होते है प्रकृति का सोदा करने वाले ? 
हमे तो इससे बेहतर बनाना है , हमारी जिम्मेवारी  तो इस जन्नत को चार चाँद लगाना है और दुनिया को बताना है कि देखो ये खूबसूरत जगह है जहाँ पेड़ है , पहाड़ है , साफ़ हवा है ( बिना पंखे और ऐसी के ), सुन्दर खेत और  बाग़ - बगीचे है .
Photo by Tanuj Jhalaan


जून महीने  में जब गर्मी अपने पीक पे होती है तब भी नोहरा में पंखें नहीं चलते , जरा सोचिये जन्नत किसे कहेंगे आप ?सीमेंट प्लांट से जो पर्यावरण को हानि  होगी उसका हमे अंदाजा भी नहीं , आज हाँ की तो आने वाली पीढ़ियाँ हमे कोसेगी . आओ खुली हवा में सांस लें :) और विकास के क्षणिक और इसे लोलीपोप का विरोध करें .

सीमेंट प्लांट को न लेकिन विकास को हाँ , मेरा नौहरा मेरी जन्नत . समय की मांग विकास है प्रदुषण नहीं | आप सबकी प्रतिक्रिया का स्वागत .
सप्रेम
मनीषा


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8 comments

  1. Very nice, this is true that development should be there but not on the cost of sacrifice of our jannat-like nature. We should demand development in other fields instead of establishing of factories like cement plant directly affecting nature and environment.

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    1. Thank you , do sign the petition . Link is given on my Facebook profile.

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  3. Good job Manisha.... And you have to put an example from kamarau village also, because after establishing the cement Plant in Ponta sahib (SATOUN) company don't focus on area development and environment.

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    1. Sure , I will add that Thank You for your feedback. 😊

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